नवी मुंबई।
नवी मुंबई से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि सपनों को पूरा करने के लिए हालात नहीं, हौसला मायने रखता है। महानगरपालिका स्कूल क्रमांक 120 के कक्षा 10वीं के छात्र अमोघ बनसोडे ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर जगह बना ली है। उसका चयन इंग्लैंड के डेवॉन में आयोजित “सीड्स ऑफ पीस इंटरनेशनल कैंप 2026” के लिए हुआ है, जहां वह भारत का प्रतिनिधित्व करेगा।
यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कैंप 18 जुलाई से 8 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान दुनिया भर से आए छात्र नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। अमोघ का इस मंच तक पहुंचना उसकी प्रतिभा और आत्मविश्वास का प्रमाण है।
इस कार्यक्रम के लिए देश के 13 राज्यों से 300 से अधिक छात्रों ने आवेदन किया था। कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद केवल 17 छात्रों को चुना गया, जिनमें अमोघ ने अपनी खास जगह बनाई। यह उपलब्धि न केवल उसके परिवार बल्कि पूरे नवी मुंबई के लिए गर्व की बात है।
अमोघ का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। वह रबाले क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रहता है। उसके पिता एक ट्रक चालक हैं और मां गृहिणी हैं। आर्थिक सीमाओं के बावजूद उसने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। परिवार में कोई भी उच्च शिक्षित नहीं है, फिर भी अमोघ ने अपने प्रयासों से यह बड़ी सफलता हासिल की है। उसकी दो बहनें भी शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
अमोघ की इस उपलब्धि पर नवी मुंबई महानगरपालिका के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने उसे बधाई दी है। स्कूल की मुख्याध्यापिका और शिक्षकों के मार्गदर्शन को भी उसकी सफलता का बड़ा कारण बताया जा रहा है।
अमोघ बनसोडे की यह सफलता हर उस छात्र के लिए एक मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखता है। उसकी यह उपलब्धि न केवल नवी मुंबई बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
