झारखंड।
झारखंड के बोकारो जिले से एक बेहद सनसनीखेज और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आठ महीने पहले लापता हुई 18 वर्षीय छात्रा पुष्पा महतो की हत्या की पुष्टि तब हुई जब जंगल से उसका कंकाल बरामद किया गया। इस मामले में जांच में भारी लापरवाही और आरोपी को बचाने के आरोप में एक साथ 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
पुष्पा महतो, जो खुंटाडीह गांव की रहने वाली थी, 21 जुलाई 2025 को कॉलेज जाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिवार ने उसी दिन पुलिस से संपर्क किया, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने तुरंत शिकायत दर्ज नहीं की। करीब 13 दिनों की देरी के बाद अपहरण का मामला दर्ज किया गया, जिससे जांच की दिशा शुरू से ही प्रभावित हुई।
आरोपी को बचाने के गंभीर आरोप
परिवार ने शुरुआत से ही पड़ोसी दिनेश महतो पर शक जताया था। लेकिन जांच में सामने आया कि पुलिस ने कथित रूप से आरोपी से पैसे लेकर उसे बचाने की कोशिश की। इतना ही नहीं, आरोपी और कुछ पुलिसकर्मियों के बीच मिलीभगत के भी संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए 23 सिम कार्ड और 4 मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद तेज हुई कार्रवाई
जब करीब छह महीने तक मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई, तो पीड़ित परिवार ने झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के सख्त रुख के बाद डीजीपी के निर्देश पर नई एसआईटी (विशेष जांच टीम) का गठन किया गया।
एसआईटी ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 11 अप्रैल 2026 को मुख्य आरोपी दिनेश महतो को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद उसी दिन जंगल से छात्रा का कंकाल और हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू बरामद किया गया।
28 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
नई जांच में यह साफ हुआ कि पहले की पुलिस टीम ने जानबूझकर जांच में देरी की और मामले को दबाने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने कड़ा कदम उठाते हुए 10 सब-इंस्पेक्टर, 5 एएसआई, 2 हवलदार और 11 सिपाहियों सहित कुल 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस दर्दनाक घटना ने पुष्पा के परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। छात्रा की मां का कहना है कि अगर पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो उनकी बेटी आज जिंदा होती। इस घटना के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। छात्रा का 16 वर्षीय भाई पढ़ाई छोड़कर राजस्थान में मजदूरी करने को मजबूर हो गया है।
अब परिवार इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग कर रहा है।
सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
यह मामला न केवल एक जघन्य अपराध है, बल्कि पुलिस व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर करता है। एक तरफ जहां आरोपी को बचाने के आरोप लगे हैं, वहीं दूसरी ओर न्याय में हुई देरी ने एक परिवार की जिंदगी तबाह कर दी।
