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सौर ऊर्जा से किसानों को दिन में बिजली: महावितरण की योजना बनी देश के लिए मॉडल”

सौर ऊर्जा से किसानों को दिन में बिजली: महावितरण की योजना बनी देश के लिए मॉडल”

मुंबई: महाराष्ट्र में किसानों को दिन के समय निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग एक बड़ी सफलता के रूप में उभरकर सामने आया है। महावितरण द्वारा लागू की जा रही ‘मुख्यमंत्री सौर कृषिवाहिनी योजना 2.0’ और ‘मांगेल त्याला सौर कृषिपंप’ योजनाओं की प्रभावी कार्यप्रणाली अब अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन रही है। मध्यप्रदेश बिजली कंपनी के अधिकारियों ने महाराष्ट्र के इस मॉडल की सराहना करते हुए इसे दिशादर्शक बताया है।

मध्यप्रदेश से आए अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार, 15 अप्रैल को मुंबई स्थित महावितरण मुख्यालय ‘प्रकाशगड’ का दौरा किया। इस दौरान उन्हें सौर ऊर्जा आधारित कृषि पंपों के जरिए किसानों को दिन में बिजली आपूर्ति करने की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। महावितरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्तुति के माध्यम से इन योजनाओं की तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक प्रभावों को समझाया।

इस मौके पर महावितरण के संचालक (संचालन/प्रकल्प) सचिन तालेवार, कार्यकारी संचालक दत्तात्रय पडळकर, मुख्य अभियंता ज्ञानेश कुलकर्णी और पंकज तगलपल्लेवार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। वहीं मध्यप्रदेश की टीम में पावर मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य महाव्यवस्थापक गुरुदीप सिंह कनुजा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

‘मुख्यमंत्री सौर कृषिवाहिनी योजना 2.0’ को दुनिया की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा परियोजनाओं में गिना जा रहा है, जिसकी कुल क्षमता 16,000 मेगावाट है। अब तक इस योजना के तहत 3,187 कृषि फीडरों का सौरकरण किया जा चुका है, जिससे राज्य के 12.82 लाख से अधिक किसानों को दिन के समय सिंचाई के लिए 4,779 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।

इस योजना के आर्थिक और सामाजिक लाभ भी उल्लेखनीय हैं। करीब 65,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 70,000 से अधिक ग्रामीण रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। इसके अलावा, महावितरण को बिजली खरीद में हर साल करीब 10,000 करोड़ रुपये की बचत हो रही है, जबकि क्रॉस-सब्सिडी का बोझ भी 13,500 करोड़ रुपये तक कम होने की संभावना है।

दूसरी ओर, ‘मांगेल त्याला सौर कृषिपंप’ योजना के तहत राज्य में अब तक 9.17 लाख से अधिक सौर कृषि पंप स्थापित किए जा चुके हैं। देशभर में लगाए गए कुल ऑफ-ग्रिड सौर पंपों में से 64 प्रतिशत केवल महाराष्ट्र में हैं, जो इस पहल की व्यापकता को दर्शाता है।

वर्तमान में महाराष्ट्र में कुल 32.76 लाख कृषि पंपों में से करीब 73 प्रतिशत पंपों को दिन में बिजली आपूर्ति की जा रही है। यह बदलाव किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रहा है, क्योंकि अब उन्हें रात के समय सिंचाई के लिए परेशान नहीं होना पड़ता


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