नवी मुंबई। शहर के बीचों-बीच स्थित बेलापुर गांव का प्राचीन अमृतेश्वर तालाब इन दिनों बदहाली का शिकार बना हुआ है। कभी शांत और आकर्षक वातावरण के लिए पहचाना जाने वाला यह तालाब अब गंदगी, दुर्गंध और अतिक्रमण की समस्याओं से जूझ रहा है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से इस ऐतिहासिक जलाशय के तात्कालिक सुंदरीकरण और संरक्षण की मांग की है।
गंदगी और दुर्गंध से परेशान लोग
तालाब का पानी लंबे समय से ठहरा हुआ है, जिससे आसपास के इलाके में तेज दुर्गंध फैल रही है। सुबह-शाम सैर के लिए आने वाले लोगों को इस बदबू और गंदगी के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द सफाई और पानी के प्रवाह की व्यवस्था नहीं की गई, तो यह समस्या स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
अतिक्रमण से बिगड़ रहा स्वरूप
तालाब के आसपास अवैध दुकानों और अतिक्रमण ने इसकी सुंदरता को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। सार्वजनिक स्थान पर बढ़ते कब्जों के कारण न केवल दृश्य खराब हो रहा है, बल्कि सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ रही हैं। इसके अलावा, तालाब का नामफलक भी जर्जर हालत में है, जिससे इसकी ऐतिहासिक पहचान धुंधली पड़ती जा रही है।
नागरिकों के सुझाव: ऐसे बदल सकती है तस्वीर
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन को कुछ अहम सुझाव भी दिए हैं। उनका मानना है कि तालाब में फाउंटेन (कारंजा) लगाने से पानी में हलचल बढ़ेगी और दुर्गंध कम होगी। साथ ही, नियमित सफाई, नामफलक की मरम्मत और अतिक्रमण हटाने से इस क्षेत्र को फिर से सुंदर और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
फिर बन सकता है आकर्षण का केंद्र
नागरिकों का विश्वास है कि यदि प्रशासन समय रहते ठोस कदम उठाता है, तो अमृतेश्वर तालाब एक बार फिर स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल स्थान के रूप में विकसित हो सकता है। यह न केवल स्थानीय लोगों के लिए सुकून भरी जगह बनेगा, बल्कि शहर की पहचान को भी मजबूती देगा।
