पनवेल।
स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर जहां पूरे महाराष्ट्र सहित देशभर में श्रद्धा, सम्मान और गौरव का माहौल देखने को मिला, वहीं पनवेल में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने शिवभक्तों की भावनाओं को गहरा आघात पहुंचाया है। 3 अप्रैल, जो कि महाराज की पुण्यतिथि का पावन दिन है, उसी दिन पनवेल नगर निगम क्षेत्र में स्थापित उनकी अश्वारूढ़ प्रतिमा पर मोटी धूल की परत जमी हुई पाई गई।
इतिहास के अनुसार, 3 अप्रैल 1680 को रायगढ़ किले पर छत्रपति शिवाजी महाराज का निधन हुआ था। 50 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली, लेकिन उनका स्वराज्य और आदर्श आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है। हर वर्ष इस दिन लोग किलों पर जाकर, प्रतिमाओं के समक्ष नमन कर, और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
लेकिन पनवेल में इस वर्ष का दृश्य बिल्कुल विपरीत रहा। जिस दिन महाराज के सम्मान में विशेष साफ-सफाई और सजावट होनी चाहिए थी, उसी दिन उनकी प्रतिमा उपेक्षा का शिकार दिखाई दी। प्रतिमा पर जमी धूल ने न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया, बल्कि यह भी सवाल खड़ा कर दिया कि क्या मनपा को इस ऐतिहासिक दिन का महत्व भी समझ है या नहीं।
स्थानीय शिवप्रेमियों और नागरिकों ने जब यह दृश्य देखा, तो उनमें तीव्र नाराजगी फैल गई। कई लोगों ने मौके पर ही नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी की और इस घटना को “श्रद्धा का अपमान” बताया। उनका कहना है कि जब आम नागरिक अपने स्तर पर महाराज की पूजा-अर्चना और सम्मान में कोई कमी नहीं छोड़ते, तो जिम्मेदार प्रशासन से ऐसी अनदेखी बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।
नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया कि पनवेल पालिका का कार्यप्रणाली पिछले कुछ समय से लगातार सवालों के घेरे में रही है। सफाई व्यवस्था से लेकर सार्वजनिक स्थलों के रखरखाव तक, कई मुद्दों पर प्रशासन की उदासीनता सामने आती रही है। इस घटना ने उन सभी आरोपों को और अधिक मजबूत कर दिया है।
शिवभक्तों ने मांग की है कि इस मामले की तत्काल जांच की जाए और जो अधिकारी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
