नवी मुंबई: Navi Mumbai Municipal Corporation की “शिक्षा रूपांतरण नीति 2026” को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। सभागृह नेता Sagar Naik द्वारा प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद Maharashtra Navnirman Sena के प्रवक्ता Gajanan Kale ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
गजानन काले ने आरोप लगाया कि यह नीति छात्रों के हित के बजाय आर्थिक लाभ और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई है। उनके अनुसार, शिक्षा के नाम पर ठेकेदारों, कंसल्टेंट्स और निजी संस्थाओं को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि आम विद्यार्थियों और मराठी माध्यम की शालाओं की अनदेखी की जा रही है।
मनसे प्रवक्ता ने कहा कि महानगरपालिका प्रशासन शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बजाय इस नीति के जरिए करोड़ों रुपये के खर्च के रास्ते खोल रहा है। उन्होंने इसे “शिक्षा के निजीकरण की दिशा में खतरनाक कदम” बताते हुए पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि इस नीति को लागू करने से पहले सार्वजनिक चर्चा कराई जाए और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की राय ली जाए, ताकि छात्रों के भविष्य के साथ कोई समझौता न हो।
वहीं, Sagar Naik या प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सूत्रों के मुताबिक, यह नीति शिक्षा में डिजिटल सुधार और आधुनिक सुविधाएं लाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
