दो-दो हाजिरी रजिस्टर, बिना ड्यूटी नाम दर्ज करने की ‘स्कीम’ का दावा; कर्मचारियों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
नवी मुंबई:
नवी मुंबई पुलिस मुख्यालय से जुड़ा एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कुछ पुलिस कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि मुख्यालय के भीतर कथित रूप से हाजिरी से जुड़ी एक अवैध “स्कीम” चल रही है, जिसमें हर महीने लगभग 30 हजार रुपये देने पर कुछ कर्मचारी बिना ड्यूटी किए भी अपनी हाजिरी दर्ज करा लेते हैं। इस कथित व्यवस्था के कारण ईमानदारी से काम करने वाले पुलिस कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का बोझ बढ़ने का आरोप लगाया गया है।
सूत्रों के अनुसार इस मामले में कुछ कर्मचारियों के बीच लंबे समय से असंतोष पनप रहा है। आरोप है कि जो कर्मचारी नियमित ड्यूटी कर रहे हैं, उन्हें लगातार अतिरिक्त शिफ्ट करनी पड़ती है, जबकि कुछ लोग कथित रूप से पैसे देकर ड्यूटी से बच निकलते हैं।
दो तरह के हाजिरी रजिस्टर रखने का आरोप
मामले से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पुलिस मुख्यालय में दो तरह के हाजिरी रजिस्टर रखे जाते हैं। पहला रजिस्टर उन कर्मचारियों के लिए होता है जो रोजाना ड्यूटी पर आते हैं और नियमित रूप से हस्ताक्षर करते हैं। जबकि दूसरा रजिस्टर कथित तौर पर कुछ कर्मचारियों के लिए अलग रखा जाता है, जिसमें कई पन्ने खाली छोड़ दिए जाते हैं।
आरोप है कि हर आठ से दस दिन बाद इन खाली पन्नों पर एक साथ कई कर्मचारियों के नाम दर्ज कर दिए जाते हैं, जिससे रिकॉर्ड में यह दिखाया जा सके कि वे कर्मचारी नियमित रूप से ड्यूटी पर उपस्थित थे। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह न केवल प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन होगा बल्कि विभागीय अनुशासन पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा।
2000 कर्मचारियों के बावजूद स्टाफ की कमी
जानकारी के मुताबिक नवी मुंबई पुलिस मुख्यालय में करीब दो हजार पुलिस कर्मचारी तैनात हैं। इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी में तळोजा जेल से आरोपियों को अदालत में पेश करना, संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था संभालना और कई प्रशासनिक ड्यूटी शामिल हैं।
हालांकि कर्मचारियों का आरोप है कि कुछ लोग कथित तौर पर ड्यूटी पर आए बिना ही हाजिरी दर्ज करा लेते हैं, जिसके कारण बाकी कर्मचारियों को लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। कई कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें समय पर छुट्टियां भी नहीं मिल पातीं और लगातार काम का दबाव बना रहता है।
नए भर्ती कर्मचारियों को नहीं होती जानकारी
सूत्रों के अनुसार हाल ही में ग्रामीण इलाकों से भर्ती होकर आए कई नए पुलिस कर्मचारियों को इस कथित व्यवस्था के बारे में शुरुआत में कोई जानकारी नहीं होती। धीरे-धीरे जब उन्हें इस “प्रणाली” के बारे में पता चलता है, तो वे भी असमंजस की स्थिति में पड़ जाते हैं।
कई कर्मचारी खुलकर शिकायत करने से इसलिए भी कतराते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं इसका असर उनकी नौकरी या पोस्टिंग पर न पड़ जाए।
महिला पुलिसकर्मियों ने भी उठाए सवाल
कुछ महिला पुलिस कर्मचारियों ने भी ड्यूटी वितरण को लेकर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि मुख्यालय के प्रवेश द्वार और प्रशासनिक भवन के आसपास की गार्ड ड्यूटी में अक्सर महिला कर्मचारियों को ही लगाया जाता है।
आरोप यह भी है कि कई बार गर्भवती महिला पुलिसकर्मियों या मासिक धर्म के दौरान भी उन्हें 24 घंटे की गार्ड ड्यूटी दे दी जाती है, जिससे उन्हें गंभीर शारीरिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। कर्मचारियों का कहना है कि इस तरह की परिस्थितियों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
2022 में भी सामने आया था वसूली का मामला
बताया जा रहा है कि वर्ष 2022 में भी इसी तरह का एक मामला सामने आया था। उस समय महिला पुलिस हवालदार सुचिता शिरोड़कर के जी-पे खाते में पैसे लेने का आरोप लगा था। मामला मीडिया में आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें जनरल ड्यूटी अमलदार के पद से हटाकर नवी मुंबई महानगरपालिका के अतिक्रमण विभाग में भेज दिया था।
इस पुराने मामले के कारण अब मौजूदा आरोपों ने और अधिक गंभीरता ले ली है।
डिजिटल लेन-देन से बचने की कोशिश?
कुछ कर्मचारियों का दावा है कि पहले ऑनलाइन भुगतान के जरिए पैसे लिए जाते थे, लेकिन विवाद सामने आने के बाद अब कथित रूप से नकद या हवाला जैसी प्रणाली से लेन-देन करने की चर्चा है, ताकि कोई डिजिटल सबूत न छोड़ा जाए।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कर्मचारियों के बीच इस तरह की चर्चा ने विभाग के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
“पुलिस दरबार” नहीं होने की भी शिकायत
सरकारी नियमों के अनुसार पुलिस विभाग में कर्मचारियों की समस्याएं सुनने के लिए समय-समय पर “पुलिस दरबार” आयोजित किया जाना आवश्यक होता है। इस मंच के माध्यम से कर्मचारी अपनी समस्याएं सीधे वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रख सकते हैं।
