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खरात केस में सबसे बड़ा खुलासा: कॉल डिटेल्स से सत्ता के गलियारों तक पहुंच के संकेत, कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में

खरात केस में सबसे बड़ा खुलासा: कॉल डिटेल्स से सत्ता के गलियारों तक पहुंच के संकेत, कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में

मुंबई: कथित भोंदू बाबा अशोक खरात से जुड़ा मामला अब एक साधारण आपराधिक जांच से आगे बढ़कर राजनीतिक तूफान का रूप लेता नजर आ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता Anjali Damania द्वारा सार्वजनिक किए गए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) ने इस केस को नया मोड़ दे दिया है। इन खुलासों में महाराष्ट्र के सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े कई प्रभावशाली नाम सामने आने का दावा किया गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

कॉल डिटेल्स से चौंकाने वाले दावे

दमानिया के अनुसार, अशोक खरात और कई नेताओं के बीच बड़ी संख्या में फोन कॉल्स हुए, जिनकी अवधि भी काफी लंबी बताई जा रही है:

Rupali Chakankar और खरात के बीच 177 कॉल्स, कुल बातचीत 33,727 सेकंड

* उनकी बहन प्रतिभा चाकणकर के 236 कॉल्स

* Eknath Shinde के 17 कॉल्स

10 इनकमिंग, 7 आउटगोइंग

एक कॉल 21 मिनट लंबा

* दीपक लोंढे (मंत्री केसरकर के करीबी) के 189 कॉल्स, कुल बातचीत 39,589 सेकंड

* Chandrakant Patil – 8 कॉल

* Sunil Tatkare – 8 कॉल

* Ashish Shelar – 1 कॉल

इन आंकड़ों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर इन बातचीतों का मकसद क्या था।

“जनता को जवाब चाहिए” – दमानिया का सीधा हमला

Anjali Damania ने उपमुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा:

“एक कथित भोंदू बाबा से इतने कॉल क्यों हुए? 21 मिनट की बातचीत में क्या चर्चा हुई, यह जनता को जानने का अधिकार है।”

उन्होंने यह भी मांग की कि संबंधित नेताओं से पूछताछ की जाए और यदि जरूरत पड़े तो कड़ी कार्रवाई की जाए।

विदेशों से भी कॉल, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का शक

दमानिया ने दावा किया कि अशोक खरात को, कतर, यूएई, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी बड़ी संख्या में कॉल्स आए हैं।

उन्होंने आशंका जताई कि व्हाट्सऐप कॉल्स की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, जिससे इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

एसआईटी के पास पहुंची पूरी जानकारी

यह पूरा डेटा मुख्यमंत्री, डीजीपी और एसआईटी प्रमुख तेजस्वी सातपुते को सौंप दिया गया है। हालांकि, दमानिया ने यह स्पष्ट किया है कि उन्हें यह जानकारी किस स्रोत से मिली, इसकी पुष्टि अभी नहीं की जा सकती।

राजनीतिक असर और आगे की दिशा

इस मामले ने अब महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष जहां इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकता है, वहीं सत्ता पक्ष के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन सकता है।


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