मुंबई – पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्तालय के वाकड पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक शत्रुघ्न माली की केवल 8 महीने में अचानक बदली किए जाने से प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। उनके खिलाफ कोई कानून-व्यवस्था संबंधी शिकायत, जनता की अर्ज़ी या राजनीतिक शिकायत न होने के बावजूद यह तबादला किया गया, जिससे हर तरफ आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है।
विशेष बात यह है कि महाराष्ट्र राज्य के पुलिस महानिदेशक ने सामान्य तबादलों तक अन्य किसी भी तबादले पर रोक लगाने का लिखित आदेश दिया था, इसके बावजूद पिंपरी-चिंचवड़ के पुलिस आयुक्त विनयकुमार चौबे द्वारा यह तबादला किए जाने का आरोप MAT कोर्ट में लगाया गया है। इस अन्यायपूर्ण तबादले के खिलाफ वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक शत्रुघ्न माली ने महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (MAT), मुंबई में याचिका दायर की।
24 मार्च 2026 को हुई सुनवाई में माननीय न्यायाधीश चक्रवर्ती ने पुलिस आयुक्त से माली के तबादले का कारण पूछा। हालांकि, आयुक्तालय माली के खिलाफ किसी भी प्रकार की शिकायत या गलती साबित करने वाले दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहा। इस पर न्यायालय ने नाराज़गी जताते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया और अगली सुनवाई 7 अप्रैल 2026 तय की गई है।
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, बॉम्बे हाईकोर्ट, MAT और पुलिस महानिदेशक के आदेशों की अनदेखी करते हुए पिंपरी-चिंचवड़ आयुक्तालय में कार्यकाल पूरा होने से पहले बड़े पैमाने पर तबादले किए जाने पर भी न्यायालय ने आश्चर्य व्यक्त किया।
जानकारी के अनुसार, पुलिस आयुक्त विनयकुमार चौबे का कार्यकाल 2024 में ही पूरा हो चुका है और तबादले की संभावना को देखते हुए उन्होंने लगभग 50 वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक, सहायक पुलिस निरीक्षक और पुलिस उपनिरीक्षक के संदिग्ध तबादले किए होने का आरोप है। इस संबंध में भी न्यायालय ने विस्तृत जानकारी मांगी है।
यह जानकारी प्राप्त करने के लिए अधिवक्ता प्रशांत नागरजोगे द्वारा पुलिस आयुक्त से पत्राचार किया गया है, जिससे आयुक्तालय की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
न्यायालय ने इस मामले को बेहद गंभीर माना है। 2024 में कार्यकाल पूरा होने के बावजूद आयुक्त का तबादला न होना और अन्य अधिकारियों के कार्यकाल से पहले तबादले किए जाने पर न्यायालय में सवाल उठाए गए हैं।
इस मामले में शत्रुघ्न माली की ओर से अधिवक्ता प्रशांत नागरजोगे पैरवी कर रहे हैं। 7 अप्रैल 2026 को MAT कोर्ट क्या निर्णय देता है, इस पर पूरे महाराष्ट्र पुलिस विभाग की नजरें टिकी हुई हैं।
