स्पर्म से बनना चाहती है मां, मामला कोर्ट में
मुंबई: मुंबई की 46 वर्षीय महिला का एक अनोखा कानूनी मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। पति से अलग रह रही यह महिला IVF प्रक्रिया के दौरान तैयार किए गए 16 फ्रीज्ड एम्ब्रियो का इस्तेमाल कर मां बनना चाहती है। लेकिन पति की सहमति न मिलने के कारण मामला कानूनी विवाद में बदल गया है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला दक्षिण मुंबई के एक दंपति से जुड़ा है। दोनों की शादी 2021 में हुई थी। इसके बाद 2022 में IVF प्रक्रिया के जरिए पति के स्पर्म और पत्नी के अंडाणु से 16 भ्रूण तैयार कर फर्टिलिटी क्लिनिक में फ्रीज कर दिए गए थे।
लेकिन 2023 में दोनों के बीच विवाद होने के बाद वे अलग रहने लगे। इसके बाद इन भ्रूणों के इस्तेमाल को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई।
महिला की क्या मांग
महिला का कहना है कि वह फ्रीज किए गए एम्ब्रियो को दूसरे क्लिनिक में ट्रांसफर कर गर्भधारण करना चाहती है।
हालांकि असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) एक्ट के अनुसार भ्रूण के उपयोग या ट्रांसफर के लिए पति और पत्नी दोनों की सहमति जरूरी होती है।
महिला का आरोप है कि उसका पति जानबूझकर सहमति नहीं दे रहा और इस तरह उसके मातृत्व के अधिकार को रोक रहा है।
“मां बनने का आखिरी मौका”
महिला ने कोर्ट में कहा कि उसकी उम्र 46 साल हो चुकी है और अब उसके पास मां बनने के लिए बहुत कम समय बचा है।
उसने यह भी बताया कि गर्भधारण की तैयारी के लिए उसने फरवरी 2024 में गर्भाशय का बड़ा ऑपरेशन करवाया था, जिसका पूरा खर्च उसने खुद उठाया।
ART बोर्ड ने खारिज की मांग
महिला ने पहले मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन बाद में इसे वापस लेकर मामला राष्ट्रीय असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) और सरोगेसी बोर्ड के पास ले गई।
बोर्ड ने फरवरी 2026 में उसकी मांग खारिज कर दी, जिसके बाद महिला ने दिल्ली हाई कोर्ट में नई याचिका दाखिल की है।
कोर्ट से क्या मांग
महिला ने कोर्ट से मांग की है कि
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उसे पति की सहमति के बिना एम्ब्रियो ट्रांसफर करने की अनुमति दी जाए
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और ART कानून के कुछ प्रावधानों की नई व्याख्या की जाए
महिला ने अपनी उम्र और घटती प्रजनन क्षमता को देखते हुए मामले की जल्द सुनवाई की भी मांग की है।
⚖️ अब इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट में जल्द सुनवाई होने की संभावना है।
