नवी मुंबई। मुंबई कृषि उत्पन्न बाजार समिति (APMC) के कांदा-बटाटा बाजार में 50 किलो वजन सीमा को लेकर व्यापारियों और माथाडी कामगारों के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रहा विवाद फिलहाल शांत होता दिखाई दे रहा है। शनिवार को बाजार परिसर में पहुंची 120 से अधिक गाड़ियों का माल उतारा गया, जिससे कांदा-बटाटा बाजार में कारोबार सामान्य रूप से चलता रहा। व्यापारियों और माथाडी कामगारों के बीच बने गतिरोध के कारण बाजार का कारोबार प्रभावित होने की आशंका थी, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के बीच कामकाज सुचारू रखने पर सहमति बनी है।
जानकारी के अनुसार, 50 किलो से अधिक वजन वाली कांदा-बटाटा की बोरियां उतारने को लेकर गुरुवार को व्यापारियों और माथाडी कामगारों के बीच विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद व्यापारियों ने बाजार में कारोबार बंद कर दिया था। वहीं, माथाडी कामगारों का कहना था कि निर्धारित वजन सीमा का पालन कराया जाना जरूरी है और 50 किलो से अधिक वजन वाली बोरियों को उतारने की व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए।
स्थिति को देखते हुए APMC प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। APMC सचिव डॉ. राजाराम धोंडकर ने तत्काल अस्थायी समाधान निकालते हुए आगामी मंगलवार को पणन मंत्री जयकुमार रावल के साथ बैठक निर्धारित की है। इस बैठक में 50 किलो वजन सीमा को लेकर व्यापारियों और माथाडी कामगारों के बीच जारी विवाद का स्थायी समाधान निकालने पर चर्चा होने की संभावना है।
55 गाड़ियों का माल भी उतारा गया
प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद शुक्रवार शाम 50 किलो से अधिक वजन वाली कांदा-बटाटा की करीब 55 गाड़ियों का माल माथाडी कामगारों ने उतारा। इसके बाद शनिवार को भी बाजार परिसर में पहुंची सभी गाड़ियों को उतार दिया गया। इससे बाजार में आवक और कारोबार पर तत्काल कोई बड़ा असर नहीं पड़ा और व्यापारियों को राहत मिली।
कहां से आता है APMC में कांदा-बटाटा?
व्यापारी संगठन के अनुसार, मुंबई APMC के कांदा-बटाटा बाजार में आने वाले माल में लगभग 60 प्रतिशत माल राज्य की अन्य कृषि उपज मंडी समितियों से, जबकि करीब 40 प्रतिशत माल सीधे किसानों से आता है। ऐसे में केवल मुंबई APMC में वजन सीमा लागू करने के बजाय उत्पादन, पैकिंग और परिवहन के स्तर पर ही व्यवस्था को प्रभावी बनाने की जरूरत बताई जा रही है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि बाजार में 50 किलो से अधिक वजन वाली बोरियां पहुंचती रहेंगी, तो unloading के समय विवाद की स्थिति बार-बार पैदा हो सकती है। इसलिए समस्या का समाधान बाजार परिसर तक सीमित रखने के बजाय बोरी निर्माण और माल भरने के स्तर पर ही 50 किलो की सीमा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
बोरी निर्माताओं पर नियम लागू करने की मांग
व्यापारी संगठन ने मांग की है कि बोरी निर्माताओं को ऐसी बोरियां तैयार करने के लिए बाध्य किया जाए, जिनमें कांदा-बटाटा 50 किलो से अधिक भरा ही न जा सके। संगठन का मानना है कि यदि बाजार समितियों के साथ-साथ बोरी निर्माण के स्तर पर भी वजन सीमा की व्यवस्था लागू कर दी जाए, तो मुंबई APMC में अधिक वजन वाली बोरियों की आवक काफी हद तक रोकी जा सकती है।
व्यापारियों के अनुसार, इसके लिए पणन विभाग, कामगार विभाग और उद्योग विभाग को संयुक्त रूप से ठोस व्यवस्था तैयार करनी होगी। केवल माथाडी कामगारों और व्यापारियों के बीच विवाद सुलझाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरी सप्लाई चेन में वजन सीमा का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
मंगलवार की बैठक पर नजर
अब सभी की नजर मंगलवार को होने वाली पणन मंत्री जयकुमार रावल के साथ बैठक पर टिकी है। माना जा रहा है कि इस बैठक में व्यापारियों, माथाडी कामगारों और APMC प्रशासन के पक्षों को ध्यान में रखते हुए 50 किलो वजन सीमा को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकते हैं।
फिलहाल बाजार में कारोबार सुचारू होने से व्यापारियों, किसानों और मालवाहक वाहनों को राहत मिली है। हालांकि, 50 किलो वजन सीमा का स्थायी और व्यावहारिक समाधान निकलना अभी बाकी है। मंगलवार की बैठक के बाद इस विवाद को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
