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तुर्भे की पत्थर खदान में बड़ा हादसा टला! मिट्टी का पहाड़ सड़क पर गिरा, वाहन दबा; अवैध गतिविधियों पर उठे सवाल

तुर्भे की पत्थर खदान में बड़ा हादसा टला! मिट्टी का पहाड़ सड़क पर गिरा, वाहन दबा; अवैध गतिविधियों पर उठे सवाल

नवी मुंबई। थाने-बेलापुर औद्योगिक क्षेत्र के तुर्भे स्थित एक पत्थर खदान में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मिट्टी भराई का कार्य करते समय भारी मात्रा में मिट्टी का ढेर अचानक खिसककर खदान की कंपाउंड दीवार को पार करते हुए सीधे सड़क पर आ गिरा। इस घटना में सड़क किनारे खड़ी एक आर्माडा गाड़ी पूरी तरह मिट्टी के नीचे दब गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना के समय वाहन में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा जनहानि हादसा टल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खदान परिसर में लंबे समय से मिट्टी भराई और अन्य कार्य किए जा रहे हैं। मंगलवार को भी जेसीबी और अन्य मशीनों की सहायता से मिट्टी डंप की जा रही थी। इसी दौरान मिट्टी का अत्यधिक दबाव बढ़ने से बड़ा हिस्सा अचानक खिसक गया और कंपाउंड वॉल को पार करते हुए सड़क तक पहुंच गया। देखते ही देखते सड़क का एक हिस्सा मिट्टी से भर गया और वहां खड़ी आर्माडा वाहन पूरी तरह दब गई।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, संबंधित विभाग के अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने तत्काल राहत कार्य शुरू करवाया। भारी मशीनों की मदद से कई घंटों की मशक्कत के बाद दबे हुए वाहन को बाहर निकाला गया। वाहन को नुकसान पहुंचा है, जिसकी जांच की जा रही है।

स्थानीय नागरिकों में रोष

घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और आसपास की कंपनियों के प्रतिनिधियों ने नाराजगी व्यक्त की है। उनका आरोप है कि खदान क्षेत्र में सुरक्षा मानकों का गंभीर रूप से उल्लंघन किया जा रहा है। मिट्टी भराई और खनन गतिविधियों के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए जाते, जिससे आसपास के लोगों की जान-माल को खतरा बना रहता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हादसे के समय सड़क पर कोई राहगीर, दोपहिया चालक या अन्य वाहन मौजूद होता, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। नागरिकों ने प्रशासन से सवाल किया है कि आखिर ऐसी जोखिमपूर्ण गतिविधियों की निगरानी क्यों नहीं की जा रही और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती।

अवैध गतिविधियों के आरोप

घटना के बाद खदान परिसर में चल रही गतिविधियों को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में कुछ कार्य निर्धारित नियमों और अनुमतियों के विपरीत किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद संबंधित विभागों ने गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके कारण इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग

नागरिकों, सामाजिक संगठनों और उद्योग प्रतिनिधियों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा नियमों की अनदेखी या किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार, संचालक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की है कि खदान क्षेत्र में चल रहे सभी कार्यों का तकनीकी ऑडिट कराया जाए और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा मानक लागू किए जाएं। फिलहाल प्रशासन मामले की जांच में जुटा हुआ है और घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।



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