नवी मुंबई। नवी मुंबई महानगरपालिका (एनएमएमसी) क्षेत्र में 4 हजार से अधिक अवैध निर्माण के मामलों को लेकर मुंबई हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अवैध निर्माणों को तोड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें संरक्षण देने या समय रहते कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। 295 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बावजूद अनुशासनात्मक कार्रवाई में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर अदालत ने नाराजगी जताई और प्रशासन से जवाब तलब किया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एनएमएमसी प्रशासन को निर्देश दिया कि अवैध निर्माण के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार पांच अधिकारियों के नाम अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं। अदालत के इस आदेश के बाद महानगरपालिका के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि आयुक्त अदालत के समक्ष किन अधिकारियों के नाम प्रस्तुत करेंगे और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
महानगरपालिका की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल अंतुरकर ने अदालत को भरोसा दिलाया कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा अगली सुनवाई में पेश किया जाएगा। वहीं, इस मामले में अधिवक्ता किशोर शेट्टी द्वारा दायर अवमानना याचिका भी न्यायालय में विचाराधीन है, जिससे प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया है।
सूत्रों के अनुसार, कई अधिकारियों की भूमिका को लेकर विभागीय स्तर पर समीक्षा चल रही है। हालांकि, अब तक किसी भी अधिकारी के खिलाफ आधिकारिक रूप से दोष तय नहीं किया गया है। इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता राजीव मोहन मिश्रा ने कहा कि हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त उपायुक्त अमरीश पटनिगिरि, वार्ड अधिकारी अशोक मढ़वी, शशिकांत तांडेल, संजय तायड़े और दत्तात्रेय नागरे सहित कई अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, इन सभी के खिलाफ कार्रवाई का अंतिम निर्णय न्यायालय और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही होगा।
हाईकोर्ट के इस रुख को नवी मुंबई में अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही सबसे बड़ी न्यायिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है तो यह भविष्य में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
