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दि. बा. पाटील' नामकरण आंदोलन पर पुलिस की सख्ती, पनवेल में ही रोका विधानसभा मार्च; सैकड़ों आंदोलनकारी हिरासत में

दि. बा. पाटील' नामकरण आंदोलन पर पुलिस की सख्ती, पनवेल में ही रोका विधानसभा मार्च; सैकड़ों आंदोलनकारी हिरासत में

पनवेल।

नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का नाम लोकनेता दि. बा. पाटील के नाम पर रखने की मांग को लेकर बुधवार को विधानसभा की ओर कूच कर रहे हजारों भूमिपुत्रों, प्रकल्पग्रस्तों और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं को पनवेल में ही पुलिस ने रोक दिया। भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिससे पूरे शहर में तनावपूर्ण माहौल बन गया। आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करने और शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक रोकने का आरोप लगाया।

सुबह पनवेल के छत्रपति शिवाजी महाराज चौक से मोर्चा शुरू होना था। इससे पहले छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई तथा आंदोलन की अगुवाई कर रहीं उपोषणकर्ता रश्मिता पोपेटा के हाथों नारियल फोड़कर विधानसभा की ओर पैदल मार्च की शुरुआत की जानी थी। लेकिन मोर्चा आगे बढ़ने से पहले ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चारों ओर से घेर लिया और कई लोगों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया।

इस दौरान महिलाओं, युवाओं और भूमिपुत्रों ने "विमानतल का नाम केवल दि. बा. पाटील के नाम पर हो", "जब-जब सरकार डरती है, पुलिस को आगे करती है" और सरकार विरोधी नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर धरना देने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटाकर वाहनों में बैठाया। कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस, धक्का-मुक्की और झड़प भी देखने को मिली।

आंदोलन में महिला संगठन, आगरी समाज की विभिन्न संस्थाएं, किसान, प्रकल्पग्रस्त, बैलगाड़ी संगठन, 27 गांव और 10 गांव समितियां, औषध विक्रेता संघ, कलाकार संगठन समेत हजारों लोग शामिल हुए। बड़ी संख्या में महिलाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।

अनुमति पर उठा विवाद

आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्होंने नियमानुसार पुलिस प्रशासन से मार्च की अनुमति मांगी थी। पहले प्रस्तावित मार्ग को बदलने के लिए पुलिस ने कहा, जिसके बाद आयोजकों ने छत्रपति शिवाजी महाराज चौक से मार्च निकालने पर सहमति जताई। इसके बावजूद अंतिम समय में अनुमति रद्द कर दी गई। इस फैसले से प्रदर्शनकारियों में भारी नाराजगी फैल गई। उनका आरोप है कि सरकार भूमिपुत्रों की आवाज दबाने के लिए प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है।

नेताओं ने सरकार और पुलिस पर लगाए आरोप

आंदोलन का नेतृत्व उपोषणकर्ता रश्मिता पोपेटा ने किया। इस दौरान सांसद सुरेश उर्फ बाळ्यामामा म्हात्रे, शेतकरी कामगार पक्ष के पूर्व विधायक बाळाराम पाटील, सामाजिक कार्यकर्ता कांतीलाल कडू समेत कई नेता मौजूद रहे। नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने मार्च शुरू होने से पहले ही प्रमुख नेताओं को हिरासत में लेकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की।

पूर्व विधायक बाळाराम पाटील ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण आंदोलन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार विरोध की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। वहीं सांसद सुरेश उर्फ बाळ्यामामा म्हात्रे ने कहा कि जिन भूमिपुत्रों ने अपनी जमीन हवाईअड्डे के लिए दी, उनके सम्मान की लड़ाई पुलिस बल से नहीं रोकी जा सकती और यह आंदोलन आगे और तेज होगा।

सत्तारूढ़ दलों पर भी साधा निशाना

आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ महायुति के घटक दल—भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट)—ने आंदोलन से दूरी बनाए रखी। इसे लेकर प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी आलोचना की और उन पर भूमिपुत्रों के मुद्दे पर मौन रहने का आरोप लगाया।

रश्मिता पोपेटा के अनशन से फिर गरमाया मुद्दा

रश्मिता पोपेटा के अनशन के बाद दि. बा. पाटील नामकरण का मुद्दा एक बार फिर प्रमुखता से सामने आया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार ने कई बार आश्वासन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। पिछले दो सप्ताह से पनवेल, उरण और आसपास के गांवों में बैठकें कर इस मार्च की तैयारी की गई थी, लेकिन पुलिस कार्रवाई से पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो गया।

फिलहाल आंदोलन स्थगित, जल्द होगी अगली रणनीति

हिरासत में लिए गए आंदोलनकारियों को बाद में रोडपाली स्थित पुलिस मुख्यालय परिसर में रखा गया। वहां भी अधिकारियों के साथ प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात को लेकर विवाद हुआ। अंततः प्रदर्शनकारियों ने अपना ज्ञापन पुलिस अधिकारियों को सौंपा।

आंदोलन के समापन पर नेताओं ने कहा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद कई आंदोलनकारी सानपाड़ा तक पहुंचने में सफल रहे, जिसे उन्होंने आंदोलन की सफलता बताया। साथ ही घोषणा की गई कि फिलहाल आंदोलन स्थगित किया जा रहा है, लेकिन अगले पंद्रह दिनों में बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि दि. बा. पाटील के नामकरण की मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।



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