नवी मुंबई। कोपरखैरणे स्थित रिलायन्स फाउंडेशन स्कूल से जुड़ा फीस वृद्धि विवाद अब और गहराता नजर आ रहा है। अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) की सदस्य द्वारा की गई शिकायतों की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट तय समयसीमा के बाद भी सामने नहीं आने से अभिभावकों में नाराजगी बढ़ गई है। वहीं, जांच प्रक्रिया में हो रही देरी ने शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की शुरुआत तब हुई जब पीटीए सदस्य मधू शंकर ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने अभिभावकों और पीटीए सदस्यों को पूरी जानकारी दिए बिना फीस में वृद्धि की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। शिकायत के अनुसार, फीस निर्धारण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए नवी मुंबई महानगरपालिका के शिक्षा विभाग ने 26 अप्रैल 2026 को तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति को स्कूल की फीस संरचना, पीटीए की कार्यप्रणाली और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
शिकायतकर्ता ने महाराष्ट्र शैक्षणिक संस्था (फीस विनियमन) अधिनियम, 2011 के तहत वर्ष 2025-26 और 2026-27 की प्रस्तावित फीस से जुड़े दस्तावेज, पीटीए की स्वीकृति संबंधी रिकॉर्ड, बैठकों की सूचनाएं और ऑडिट रिपोर्ट की प्रतियां मांगी थीं। उनका कहना है कि यदि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई है तो संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने और जांच पूरी करने में देरी नहीं होनी चाहिए।
अभिभावकों का आरोप है कि रिपोर्ट में हो रही देरी से कई तरह की आशंकाएं जन्म ले रही हैं। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग को जांच की स्थिति सार्वजनिक कर पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए, ताकि अभिभावकों का विश्वास कायम रह सके।
सूत्रों के अनुसार, जांच समिति ने कुछ दस्तावेजों की जांच और संबंधित पक्षों से जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट अब तक शिक्षण उपायुक्त को सौंपी गई है या नहीं, इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच, कई अभिभावकों ने मांग की है कि जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द सार्वजनिक की जाए और यदि फीस वृद्धि प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
फिलहाल पूरे मामले पर शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई और जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और स्कूल प्रशासन ने फीस निर्धारण प्रक्रिया में नियमों का पालन किया था या नहीं।
