नवी मुंबई।
पनवेल स्थित ऐतिहासिक ‘सावरकर सदन’ को लेकर विवाद अब बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है। पुनर्विकास की प्रक्रिया के बीच इस इमारत को नुकसान पहुंचने या गिराए जाने की आशंका ने स्थानीय नागरिकों, हिंदुत्ववादी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। शुक्रवार को पनवेल में हिंदू जनजागृति समिति समेत कई संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वीर विनायक दामोदर सावरकर से जुड़ी यह इमारत महाराष्ट्र की ऐतिहासिक और वैचारिक धरोहर है, जिसे किसी भी कीमत पर नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। आंदोलन के दौरान “सावरकर का अपमान नहीं सहेगा महाराष्ट्र”, “धरोहर बचाओ” और “राष्ट्रीय स्मारक घोषित करो” जैसे नारे पूरे इलाके में गूंजते रहे।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन की उदासीनता के कारण यह मामला लंबे समय से लटका हुआ है। उन्होंने दावा किया कि ‘सावरकर सदन’ को हेरिटेज दर्जा देने की सिफारिश पहले ही की जा चुकी है, लेकिन अब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिलने से लोगों में भारी नाराजगी है।
प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि देश के अन्य ऐतिहासिक भवनों को संरक्षण दिया जाता है, लेकिन सावरकर से जुड़ी धरोहरों के मामले में गंभीरता दिखाई नहीं जाती। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य ऐतिहासिक इमारतों को राष्ट्रीय महत्व देकर संरक्षित किया जा सकता है, तो ‘सावरकर सदन’ को क्यों नहीं।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की कि इस इमारत को केवल संरक्षित ही न किया जाए, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर यहां संग्रहालय और शोध केंद्र भी विकसित किया जाए। उनका कहना है कि इससे नई पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन और सावरकर के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी।
प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया था। हालांकि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही, लेकिन संगठनों ने सरकार को खुली चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन पूरे महाराष्ट्र में फैलाया जाएगा।
राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे ने हलचल बढ़ा दी है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।
