नवी मुंबई : नवी मुंबई महानगरपालिका के वाशी स्थित मनपा अस्पताल में करोड़ों रुपये खर्च कर लगाई गई अत्याधुनिक एमआरआई मशीन पिछले कई दिनों से पूरी तरह तैयार होने के बावजूद शुरू नहीं हो सकी है। वजह केवल इतनी बताई जा रही है कि संबंधित मंत्री के पास उद्घाटन के लिए समय नहीं है। इस देरी का खामियाजा अब आम नागरिकों और गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें मजबूर होकर निजी अस्पतालों में महंगी जांच करानी पड़ रही है।
सूत्रों के अनुसार, मनपा अस्पताल में स्थापित एमआरआई मशीन तकनीकी रूप से पूरी तरह कार्यरत है और अस्पताल प्रशासन द्वारा आवश्यक सभी प्रक्रियाएं भी पूरी की जा चुकी हैं। इसके बावजूद मशीन को मरीजों के लिए चालू नहीं किया गया है। सरकारी अस्पताल में सस्ती जांच की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को अब निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां एमआरआई जांच के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
इस मुद्दे को लेकर उबाठा गुट के नवी मुंबई जिला अध्यक्ष प्रकाश पाटिल ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के पैसों से खरीदी गई मशीन को केवल राजनीतिक उद्घाटन के कारण बंद रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सुविधा कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता की बुनियादी जरूरत है और इसमें देरी सीधे मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ है।
प्रकाश पाटिल ने आरोप लगाया कि यदि मशीन तैयार है तो उसे तत्काल शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन और संबंधित मंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अगले 24 घंटे में एमआरआई सेवा शुरू नहीं की गई, तो उबाठा गुट की ओर से आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता की स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर किसी प्रकार की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी।
स्थानीय नागरिकों में भी इस मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जब सुविधा उपलब्ध हो जाती है तो उसे जनता तक पहुंचाने में लापरवाही बरती जाती है। कई मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि उद्घाटन जैसी औपचारिकताओं से ऊपर उठकर तुरंत एमआरआई सेवा शुरू की जाए, ताकि गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों को राहत मिल सके।
अब यह मामला केवल एक मशीन के उद्घाटन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनशीलता और स्वास्थ्य सेवाओं की प्राथमिकता पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। नवी मुंबई के नागरिकों की नजरें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
