नवी मुंबई। आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति रस और सनातन संस्कृति की अनुपम छटा से सराबोर नेरुल सेक्टर-25 स्थित बिहार मित्र मंडल परिसर इन दिनों भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा है। बाहर से आने वाले कैंसर मरीजों एवं उनके परिजनों के ठहरने के उद्देश्य से निर्मित भारतरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भवन के प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आज भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे परिसर को वृंदावन धाम जैसा आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान कर दिया।
वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक पंडित अजीत कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने सात दिनों तक अपने मधुर वाणी और ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण भक्ति में भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान प्रस्तुत मनमोहक झांकियां, राधा-कृष्ण भजन, संकीर्तन एवं भक्तिमय प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कराई। कथा स्थल पर प्रतिदिन सुबह से देर रात तक भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती रही।
समापन दिवस पर कथा का सार प्रस्तुत करते हुए पंडित अजीत कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिव्य कला है। यह मनुष्य को संसार त्यागने की नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए निष्काम कर्म, भक्ति और सेवा के माध्यम से ईश्वर से जुड़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने भीतर के अहंकार, लोभ और मोह का त्याग कर पूर्ण श्रद्धा एवं समर्पण के साथ प्रभु की शरण में जाता है, तभी उसके जीवन में वास्तविक शांति और आनंद का उदय होता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागते-भागते मानसिक तनाव और अशांति से घिर गया है। ऐसे समय में श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को सही दिशा देने का कार्य करती है। कथा में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, गोपी प्रेम, भक्तों के प्रति करुणा और धर्म की स्थापना का संदेश हर व्यक्ति को जीवन में प्रेम, करुणा और मानवता अपनाने की प्रेरणा देता है।
कथावाचक ने भागवत शब्द की व्याख्या करते हुए कहा— “भा” अर्थात भक्ति,
“ग” अर्थात ज्ञान,
“व” अर्थात वैराग्य,
और “त” अर्थात तत्त्व या परमात्मा।
उन्होंने कहा कि जब इन चारों तत्वों का संगम मनुष्य के जीवन में होता है, तभी जीवन सार्थक बनता है। श्रीमद्भागवत वेदों, उपनिषदों और पुराणों का सार है, जिसके श्रवण मात्र से मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भय, पाप तथा मानसिक विकारों से मुक्ति मिलती है।
समापन दिवस पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण एवं राधारानी की विशेष आरती में भाग लिया। कथा स्थल पर “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कई श्रद्धालु भावुक होकर भजन-कीर्तन में झूमते नजर आए। महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की बड़ी भागीदारी ने आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया।
बिहार मित्र मंडल के पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था पिछले कई वर्षों से धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है। संस्था द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि सामाजिक एकता और मानव सेवा की भावना को भी बढ़ावा देते हैं।
इस वर्ष कथा के यजमान अनिल सिंह एवं राकेश जायसवाल अपने परिवार सहित रहे। कथा के दौरान प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद एवं महाप्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई थी। आयोजन को सफल बनाने में संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों एवं स्थानीय श्रद्धालुओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अधिकमास के पावन अवसर पर आयोजित इस श्रीमद्भागवत कथा ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना की नई ज्योति प्रज्ज्वलित कर दी। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने की कामना की।
