मुंबई।
शहरों के विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर पर्यावरण के साथ गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। ‘सुराज्य अभियान’ के राज्यव्यापी निरीक्षण में यह उजागर हुआ कि प्रशासन और ठेकेदारों की अनदेखी के कारण हजारों पेड़ों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।
मुंबई में आयोजित पत्रकार परिषद में ‘सुराज्य अभियान’ के राज्य समन्वयक अभिषेक मुरुकटे ने आरोप लगाया कि National Green Tribunal (NGT) के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि NGT Act 2010 की धारा 26 के तहत दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई की जाए।
Brihanmumbai Municipal Corporation द्वारा शुरू किए गए ‘वृक्ष संजीवनी’ अभियान पर भी सवाल उठाए गए हैं। अभियान के तहत पेड़ों के आसपास का कंक्रीट हटाया जा रहा है, लेकिन ‘सुराज्य अभियान’ का कहना है कि यह केवल एक अस्थायी पहल है। उनका तर्क है कि यदि सड़क निर्माण के समय ही नियमों का पालन किया जाए, तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होगी।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि Pune Municipal Corporation ने पिछले दो वर्षों में लगाए गए 17,533 पेड़ों की वर्तमान स्थिति का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात स्वीकार की है। इसे जनता के पैसे की बर्बादी बताते हुए अभियान ने इस पर गंभीर चिंता जताई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट डालने से उनकी जड़ों तक पानी और हवा नहीं पहुंच पाती, जिससे उनका विकास रुक जाता है। इसके कारण भूजल पुनर्भरण प्रभावित होता है और शहरों में ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव तेजी से बढ़ता है।
NGT के नियमों के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में पेड़ों के आसपास कम से कम 1 मीटर क्षेत्र कच्चा रखना अनिवार्य है। इसके अलावा पेड़ों पर कील ठोककर विज्ञापन लगाना भी अवैध है, लेकिन इन नियमों का पालन जमीन पर नजर नहीं आता।
‘सुराज्य अभियान’ ने राज्य के विभिन्न शहरों में पत्रकार परिषद आयोजित कर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। इसमें डी-कंक्रीटीकरण अभियान को स्थायी रूप से लागू करने, ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने और पिछले तीन वर्षों के वृक्षारोपण का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने की मांग की गई है।
अभियान ने प्रशासन को 7 कार्यदिवस का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो NGT में आपराधिक शिकायत और अवमानना याचिका दायर की जाएगी
