पैसों के आरोप से बढ़ा तनाव,ब्रेन हैमरेज के बाद अस्पताल में भर्ती
वरिष्ठ उपाध्यक्ष को दो महीने चार्ज नहीं
भदोही | स्वतंत्र भारत डिजिटल
ज्ञानपुर डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन में आखिर चल क्या रहा है? निर्वाचित वरिष्ठ उपाध्यक्ष को करीब दो महीने तक पद का चार्ज नहीं मिला, वकालतनामा की रकम को लेकर विवाद खड़ा हुआ और अब मानसिक प्रताड़ना के आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।
अधिवक्ता सुबास शंकर दुबे के बेटे अमित कुमार दुबे ने इस पूरे मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक भदोही के सामने शिकायत दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके पिता ज्ञानपुर डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए थे। उस समय अध्यक्ष शील कुमार चौबे, महामंत्री आनंद कुमार शुक्ला और उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार तिवारी पद पर थे। आरोप है कि चुनाव के बाद भी उनके पिता को लगभग दो महीने तक पद का कार्यभार नहीं सौंपा गया।
मामला यहीं नहीं रुका। शिकायत के मुताबिक, इसी अवधि के वकालतनामा से जुड़ी रकम के हिसाब-किताब को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि पहले रकम का हिसाब स्पष्ट नहीं किया गया और बाद में उल्टा वरिष्ठ उपाध्यक्ष पर ही पैसा खाने का आरोप लगाकर रकम भरने का दबाव बनाया गया।
???? आरोप: लगातार दबाव और मानसिक प्रताड़ना
परिवार का आरोप है कि इस पूरे विवाद से अधिवक्ता सुबास शंकर दुबे मानसिक तनाव में आ गए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि अधिवक्ता के.के. सिंह द्वारा आवेदन जारी करने को लेकर दबाव बनाया जा रहा था।लगातार बने तनाव के बीच उनकी तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है और वर्तमान में उनका ग्लेसी हॉस्पिटल में उपचार चल रहा है।इस बारे में ज्ञानपुर बार एसोशिएशन के तरफ से बयान का इंतजार है ।
सवाल अब कई हैं...
निर्वाचित पदाधिकारी को दो महीने तक चार्ज क्यों नहीं मिला?
वकालतनामा की रकम का पूरा हिसाब-किताब कहां है?अगर रकम को लेकर कोई गड़बड़ी नहीं थी, तो विवाद की असल वजह क्या थी?और क्या किसी अधिवक्ता पर दबाव बनाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया?इन सवालों का जवाब अब निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा।परिवार ने एसपी से पूरे मामले में दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।अब निगाहें पुलिस जांच पर हैं—क्या शिकायत में लगाए गए आरोपों की परतें खुलेंगी, या मामला बार की अंदरूनी राजनीति तक ही सीमित रहेगा?
