नवी मुंबई। गणेशोत्सव को पर्यावरणपूरक, प्लास्टिकमुक्त और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए नवी मुंबई महानगरपालिका ने शहरवासियों से विशेष अपील की है। आगामी 14 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले श्रीगणेशोत्सव के दौरान नागरिकों और सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों से पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने का आह्वान महापौर सुजाता पाटील और मनपा आयुक्त डॉ. कैलास शिंदे ने किया है।
महाराष्ट्र शासन के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से वर्षभर के सभी त्योहार पर्यावरणपूरक तरीके से मनाने के लिए जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप मनपा ने गणेशोत्सव के लिए विभिन्न उपायों की जानकारी दी है। मनपा का उद्देश्य गणेशोत्सव के दौरान होने वाले जल, वायु, ध्वनि और कचरा प्रदूषण को कम करना तथा प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना है।
मनपा ने नागरिकों से शाडू मिट्टी से बनी पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाओं की स्थापना करने की अपील की है। पीओपी, प्लास्टिक और सीमेंट से बनी मूर्तियों तथा उनमें इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रंगों से विसर्जन के बाद जलस्रोत प्रदूषित होने की आशंका रहती है। ऐसे में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए शाडू मिट्टी की मूर्तियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है।
सजावट में प्लास्टिक और थर्माकोल से बचने की अपील
गणेशोत्सव की सजावट में थर्माकोल और प्लास्टिक से बने अविघटनशील सामान का इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया है। इसके बजाय कागज, पुठ्ठे और कपड़े जैसी पर्यावरण अनुकूल सामग्री का उपयोग करने की अपील की गई है।
नवी मुंबई मनपा के सीबीडी बेलापुर स्थित वस्त्र पुनर्प्रक्रिया केंद्र के माध्यम से कपड़े से आकर्षक सजावटी सामग्री तैयार की गई है। नागरिकों को यह सामग्री आसानी से उपलब्ध कराने के लिए मनपा मुख्यालय और सभी आठ विभागीय कार्यालयों में विशेष स्टॉल लगाए जा रहे हैं। मनपा ने नागरिकों से इन स्टॉल का लाभ उठाकर पर्यावरण अनुकूल सजावट करने की अपील की है।
कृत्रिम तालाबों में विसर्जन को प्राथमिकता
प्राकृतिक जलस्रोतों में होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए मनपा की ओर से नवी मुंबई के विभिन्न विभागों में सार्वजनिक स्थानों पर कृत्रिम विसर्जन तालाब बनाए जा रहे हैं। इन कृत्रिम तालाबों की जानकारी जीपीएस लोकेशन सहित मनपा की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर उपलब्ध कराई जाएगी।
मनपा ने विशेष रूप से कहा है कि 6 फीट से कम ऊंचाई वाली सभी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में ही किया जाए। नागरिकों से प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए कृत्रिम तालाबों का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की गई है।
डीजे और लाउडस्पीकर की आवाज पर भी नियंत्रण
गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी मनपा ने सावधानी बरतने की अपील की है। आवासीय क्षेत्रों में सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक ध्वनि सीमा 55 डेसिबल और रात 10 बजे से मध्यरात्रि तक 45 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए। मध्यरात्रि के बाद लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर सख्त मनाही रहेगी।
महाप्रसाद में भेसल से बचने की अपील
सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों को महाप्रसाद तैयार करते समय अन्न एवं औषधि प्रशासन के नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। श्रद्धालुओं को पौष्टिक, स्वच्छ और भेसलमुक्त महाप्रसाद उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक सावधानी बरतने का निर्देश दिया गया है।
गणेश प्रतिमा के आगमन और विसर्जन जुलूस के दौरान छोटे बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और गर्भवती महिलाओं की विशेष देखभाल करने की अपील भी की गई है।
फटाकों से दूरी, स्वच्छता पर जोर
मनपा ने नागरिकों से गणेशोत्सव के दौरान प्लास्टिक और थर्माकोल का पूरी तरह इस्तेमाल बंद करने, कपड़े या कागज की थैलियों का उपयोग करने तथा अधिक से अधिक पुनर्वापर योग्य वस्तुओं का इस्तेमाल करने का आह्वान किया है। साथ ही फटाकों का उपयोग टालने और उत्सव के दौरान कचरा न फैलाने की अपील की गई है।
मनपा ने कहा कि ‘माझी वसुंधरा अभियान’, ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26’ और ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण अभियान’ के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए नवी मुंबईकर इस वर्ष गणेशोत्सव को कचरामुक्त, प्रदूषणमुक्त, प्लास्टिकमुक्त और पर्यावरणपूरक बनाएं। मनपा ने नागरिकों, गणेशोत्सव मंडलों, स्वयंसेवी संस्थाओं और पर्यावरणप्रेमियों से सामूहिक भागीदारी के जरिए ‘इकोफ्रेंडली श्रीगणेशोत्सव 2026’ को सफल बनाने की अपील की है।
