20 साल बाद CBI विशेष अदालत का फैसला, माफी के गवाह की गवाही अविश्वसनीय; जांच में गंभीर खामियों पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मुंबई। महाराष्ट्र के बहुचर्चित पवनराजे निंबाळकर ( Pawanraje Nimbalkar ) हत्याकांड में करीब 20 साल बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व गृह मंत्री डॉ. पद्मसिंह पाटिल (Padamsinh Patil ) समेत सभी 8 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में असफल रहा।
सीबीआई विशेष अदालत के न्यायाधीश एस.आर. नावंदर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पूरा मामला मुख्य रूप से माफी के गवाह पारसमल जैन की गवाही पर आधारित था। हालांकि, उसने अलग-अलग समय पर कई बार अपने बयान बदले, जिससे उसकी गवाही भरोसेमंद नहीं रही। अदालत ने कहा कि केवल ऐसे गवाह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
फैसला सुनाते समय अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त नहीं किए गए, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) अदालत में साबित नहीं किए गए, घटनास्थल का पुनर्निर्माण (रीक्रिएशन) नहीं किया गया और कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों की वैज्ञानिक तरीके से जांच नहीं हुई। इन गंभीर कमियों के कारण अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर हो गया।
अदालत ने यह भी माना कि पवनराजे निंबाळकर और डॉ. पद्मसिंह पाटिल के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता थी, लेकिन केवल राजनीतिक दुश्मनी के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। दोष सिद्ध करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक हैं।
बरी किए गए आरोपी
- डॉ. पद्मसिंह पाटिल
- सतीश मंदाडे
- मोहन शुक्ला
- शशिकांत कुलकर्णी
- कैलाश यादव
- दिनेश तिवारी
- पिंटू सिंह
- छोटे पांडे
क्या था मामला?
3 जून 2006 को नवी मुंबई के कळंबोली में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर कांग्रेस नेता पवनराजे निंबाळकर की कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी गई थी। इस हमले में उनके चालक समद काजी की भी मौत हो गई थी। सीबीआई ने इस मामले में पूर्व गृह मंत्री डॉ. पद्मसिंह पाटिल पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था। हालांकि, दो दशक तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
