पुणे।
महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी चिंचवड़ इलाके में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 7 से 12 बताई गई थी, लेकिन बाद में यह आंकड़ा बढ़कर 17 तक पहुंच गया। इस मामले में पुलिस और आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मुख्य आरोपी योगेश वानखेड़े को गिरफ्तार कर लिया है। दूसरी ओर कर्नाटक की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जहां पूर्व मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने कांग्रेस हाईकमान द्वारा दिए गए राज्यसभा प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
पुणे के पिंपरी चिंचवड़ क्षेत्र के फुगवाड़ी और आसपास के इलाकों में बीते दो दिनों के दौरान कई लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। स्थानीय लोगों के अनुसार, सभी ने एक ही अवैध ठिकाने से शराब खरीदी थी। शराब पीने के कुछ घंटों बाद लोगों को उल्टी, आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और बेहोशी जैसी शिकायतें होने लगीं। गंभीर हालत में कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
जांच में सामने आया कि शराब में मेथनॉल जैसी जहरीली रासायनिक सामग्री मिलाई गई थी। पुलिस और आबकारी विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान बड़ी मात्रा में अवैध शराब और केमिकल बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार योगेश वानखेड़े इस अवैध नेटवर्क का बड़ा सप्लायर माना जा रहा है। उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है।
घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश देखने को मिला। कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। कुछ स्थानों पर अवैध शराब बेचने वाली दुकानों में तोड़फोड़ भी की गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से इलाके में खुलेआम अवैध शराब बेची जा रही थी, लेकिन प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की।
महाराष्ट्र सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि मेथनॉल की सप्लाई कहां से हुई और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
इसी बीच कर्नाटक की राजनीति में भी बड़ा मोड़ आया। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने साफ कर दिया कि उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में जाने में कोई रुचि नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने विनम्रता से इसे अस्वीकार कर दिया। सिद्धारमैया ने कहा कि वे कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहेंगे और जनता के बीच काम करते रहेंगे।
सिद्धारमैया के इस फैसले को कर्नाटक कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि उनके इस कदम से राज्य की सत्ता और संगठन में नए समीकरण बन सकते हैं। पार्टी नेतृत्व अब अगले राजनीतिक कदम पर विचार कर रहा है।
