भदोई।
देश में कानून को सबके लिए समान बताया जाता है, लेकिन कई घटनाएं इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर देती हैं। भदोही कोतवाली क्षेत्र से सामने आया एक मामला प्रशासनिक संवेदनशीलता और पुलिस कार्रवाई पर चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के मुताबिक, 14 वर्षीय किशोरी, जो एक निजी कंपनी में काम करती थी, को 12 मई की शाम करीब 5 बजे मजदूरी देने के बहाने फोन कर बुलाया गया। वह घर से निकली, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटी। तब से परिवार लगातार उसकी तलाश में भटक रहा है। परिजन पुलिस थाने के चक्कर लगा रहे हैं, मगर अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
परिवार का आरोप है कि यदि किसी प्रभावशाली परिवार की बेटी लापता होती, तो पुलिस और प्रशासन तुरंत हरकत में आ जाता। जगह-जगह दबिश दी जाती, विशेष टीमें बनाई जातीं और मामला सुर्खियों में रहता। लेकिन गरीब मजदूर परिवार की बेटी होने के कारण मामले को अपेक्षित गंभीरता नहीं मिल रही।
किशोरी के पिता रंगाई-पुताई का काम कर परिवार का गुजारा करते हैं। आर्थिक तंगी के बीच बेटी के अचानक गायब होने से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। माता-पिता का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी मांग सिर्फ इतनी है कि उनकी बेटी सुरक्षित घर लौट आए।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष और तेज जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि बच्ची की जल्द से जल्द बरामदगी सुनिश्चित की जाए और यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
यह मामला सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है जहां कई बार इंसाफ और कार्रवाई की रफ्तार व्यक्ति की आर्थिक और सामाजिक स्थिति देखकर बदलती हुई नजर आती है।
