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एमएच-सीईटी में ‘मार्क्स मैजिक’ का खेल? कम नंबर वालों को 100 पर्सेंटाइल मिलने से मचा हड़कंप

एमएच-सीईटी में ‘मार्क्स मैजिक’ का खेल? कम नंबर वालों को 100 पर्सेंटाइल मिलने से मचा हड़कंप

मुंबई।

महाराष्ट्र की एमएच-सीईटी परीक्षा अब नए विवादों के केंद्र में आ गई है। राज्य की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में शामिल एमएच-सीईटी के परिणामों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस नेता Sachin Sawant ने दावा किया है कि जिन छात्रों को 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में बेहद कम अंक मिले थे, वही छात्र एमएच-सीईटी में 99.99 और 100 पर्सेंटाइल हासिल कर रहे हैं।

इस दावे के बाद शिक्षा जगत, छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी चिंता का माहौल बन गया है। विपक्ष ने इसे संभावित परीक्षा घोटाला बताते हुए राज्य सरकार और परीक्षा संचालन तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

मुंबई के तिलक भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सचिन सावंत ने कहा कि एमएच-सीईटी का सिलेबस पूरी तरह 11वीं और 12वीं के विज्ञान विषयों पर आधारित होता है। ऐसे में जिन छात्रों का बोर्ड परीक्षा में प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा हो, उनका अचानक राज्यस्तरीय प्रतियोगी परीक्षा में टॉप करना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

“फेल छात्र कैसे बने सुपर टॉपर?”

सावंत ने दावा किया कि एक छात्र, जिसे 10वीं बोर्ड में गणित में केवल 22 अंक मिले थे और 12वीं में भी गणित विषय में वह असफल रहा, उसी छात्र को एमएच-सीईटी में 99.971 पर्सेंटाइल प्राप्त हुए।

उन्होंने कहा कि यह सामान्य शैक्षणिक सुधार नहीं माना जा सकता। यदि कोई छात्र लगातार कमजोर प्रदर्शन के बाद अचानक परफेक्ट स्कोर के करीब पहुंच जाता है, तो परीक्षा प्रणाली की तकनीकी और प्रशासनिक जांच अनिवार्य हो जाती है।

टॉपर्स लिस्ट पर बढ़ा शक

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एमएच-सीईटी गणित में 100 पर्सेंटाइल हासिल करने वाले कई छात्रों के 12वीं बोर्ड में गणित विषय के अंक औसत से भी कम थे।

उन्होंने दावा किया कि टॉप-20 रैंकर्स में शामिल कई छात्रों के पीसीएम (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) अंक 60 प्रतिशत से नीचे थे। कुछ छात्रों के गणित में केवल 35 अंक होने के बावजूद वे परीक्षा में “परफेक्ट स्कोरर” बन गए।

सावंत ने कहा कि यदि परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी है तो सरकार को टॉपर्स की उत्तर पुस्तिकाएं, मूल्यांकन प्रणाली, सर्वर डेटा और तकनीकी प्रक्रिया सार्वजनिक करनी चाहिए।

परीक्षा सेल पर भी उठे सवाल

सावंत ने आरोप लगाया कि पिछले 8 से 10 वर्षों से परीक्षा सेल में एक ही समूह के अधिकारी कार्यरत हैं और उनकी बदली तक नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया पर कुछ अधिकारियों का स्थायी नियंत्रण होना संदेह को और बढ़ाता है।

उन्होंने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर परीक्षा संचालन की पूरी जिम्मेदारी किन अधिकारियों के हाथ में है और इतने वर्षों से व्यवस्था में बदलाव क्यों नहीं किया गया।

SIT जांच की मांग

कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की एसआईटी या न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी प्रकार की तकनीकी छेड़छाड़, डेटा मैनिपुलेशन या परीक्षा घोटाला सामने आता है तो दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र जैसे शिक्षित राज्य में प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठना बेहद गंभीर विषय है। सरकार को तुरंत कार्रवाई कर छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करना चाहिए।


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