दिवा (ठाणे): ठाणे महानगरपालिका के अंतर्गत आने वाले दिवा–शीळ इलाके में अवैध गोदामों का तेजी से फैलता नेटवर्क अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पिछले कुछ वर्षों में, खासकर 2022 से 2026 के बीच, इस क्षेत्र में बिना अनुमति के हजारों की संख्या में टिन शेड (पत्रा) वाले गोदाम खड़े कर दिए गए हैं, जिससे न केवल शहर के नियोजित विकास को झटका लगा है, बल्कि महानगरपालिका के राजस्व पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
तेजी से बढ़ता अवैध निर्माण, प्रशासन बेखबर?
दिवा–शीळ रोड, भारत गियर से पुलिस स्टेशन तक और दिवा ब्रिज से शिळफाटा तक का पूरा बेल्ट इन अवैध गोदामों से घिरता जा रहा है। इन निर्माणों के लिए किसी भी प्रकार की आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रातों-रात गोदाम तैयार कर लिए जाते हैं और उनमें विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक कार्य शुरू कर दिए जाते हैं।
इस मुद्दे को लेकर शिवसेना की नगरसेविका अर्चना निलेश पाटील ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है और सवाल उठाया है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण होते कैसे रहे।
करोड़ों का राजस्व नुकसान, कोई रिकॉर्ड नहीं
इन गोदामों में चल रहे व्यवसायों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि महानगरपालिका को मिलने वाला व्यावसायिक कर बड़े पैमाने पर चोरी हो रहा है। अगर इन सभी गोदामों को वैध कर दिया जाए या इन पर कार्रवाई की जाए, तो करोड़ों रुपये का राजस्व वसूला जा सकता है।
सुरक्षा पर मंडराता बड़ा खतरा
इन अवैध गोदामों में ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण की आशंका जताई जा रही है। साथ ही कई जगहों पर छोटे-छोटे कारखाने भी संचालित हो रहे हैं, जो बिना किसी सुरक्षा मानकों के चल रहे हैं।
संकरी गलियों और अव्यवस्थित निर्माण के कारण फायर ब्रिगेड की पहुंच मुश्किल
*किसी भी प्रकार का फायर ऑडिट नहीं
* आसपास के रिहायशी इलाकों के लिए गंभीर खतरा
* बड़े हादसे की आशंका हमेशा बनी रहती है
* शहर की छवि पर असर
हालांकि ठाणे शहर ने स्वच्छता रैंकिंग में 35वें स्थान से 15वें स्थान तक छलांग लगाई है, लेकिन दिवा क्षेत्र में फैले अवैध और बदसूरत निर्माण शहर की सुंदरता पर दाग लगा रहे हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इस रैंकिंग में गिरावट आ सकती है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
नगरसेविका अर्चना पाटील ने 16 मार्च 2026 को संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस मामले में दिवा प्रभाग के सहायक आयुक्त शिवप्रसाद नागरगोजे ने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन गोदामों के लिए कोई भी अधिकृत अनुमति नहीं दी गई है और अगर कहीं अवैध निर्माण पाया जाता है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
क्या हैं मुख्य मांगें?
* सभी अवैध गोदामों का सर्वे और जानकारी सार्वजनिक की जाए
* संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
* बकाया कर की वसूली की जाए
* अवैध निर्माणों पर तत्काल कार्रवाई हो
