ठाणे: महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कासारवडवली पुलिस थाने में दर्ज एक गंभीर लैंगिक अत्याचार मामले ने कानून व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एफआईआर क्रमांक 0222/2026 (दिनांक 24 मार्च 2026) के तहत भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 64(2)(एम), 69, 115(2) और 351(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।
मामले में आरोपी अभिजीत अशोकराव चव्हाण बताया जा रहा है, जो एक पीडब्ल्यूडी कॉन्ट्रैक्टर और डेवलपर है। जानकारी के अनुसार, वह “अभिजीत चव्हाण इन्फ्रा डेव्हलपर्स एलएलपी” नामक फर्म से जुड़ा हुआ है, जो औरंगाबाद में संचालित बताई जाती है।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी के कई राजनीतिक व्यक्तियों, पदाधिकारियों तथा शासकीय अधिकारियों से करीबी संबंध होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यही वजह है कि इस मामले की जांच को लेकर संदेह व्यक्त किया जा रहा है और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद आरोपी को केवल 2 दिनों की पुलिस हिरासत में रखा गया और उसके बाद उसे रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने पीड़िता और आम लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है।
पीड़िता पक्ष का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण और संगनमत के चलते जांच प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिसके कारण उन्हें न्याय मिलने में देरी हो रही है। इस मामले में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और सखोल जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे कानून व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है।
