नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शुक्रवार) सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित होगी, जिसमें मौजूदा भू-राजनीतिक हालात और उनके भारत पर संभावित असर को लेकर व्यापक चर्चा की जाएगी।
राज्यों की तैयारी और समन्वय पर फोकस
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का प्रभाव देश के अंदर न्यूनतम रखा जा सके। बैठक में ऊर्जा आपूर्ति, महंगाई, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।
सरकार “टीम इंडिया” के सिद्धांत पर काम करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हर राज्य किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहे।
चुनावी राज्यों के लिए अलग व्यवस्था
जिन राज्यों में फिलहाल चुनावी माहौल के चलते ‘आदर्श आचार संहिता’ लागू है, वहां के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। हालांकि, इन राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ अलग से कैबिनेट सचिवालय स्तर पर बैठक की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तरह की कमी न रह जाए।
सात अधिकार प्राप्त समूहों की सक्रियता
इससे पहले संसद में संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया था कि सरकार इस संकट के प्रभाव को कम करने के लिए पूरी तरह सक्रिय है। सरकार ने ईंधन, आपूर्ति श्रृंखला, उर्वरक और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की निगरानी के लिए सात ‘अधिकार प्राप्त समूह’ (Empowered Groups) का गठन किया है।
ये समूह पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण उत्पन्न आर्थिक और सामरिक चुनौतियों का विश्लेषण कर रहे हैं और संभावित जोखिमों को कम करने के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं।
भारत पर संभावित असर
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पश्चिम एशिया में स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका सीधा असर भारत की तेल-गैस सप्लाई, महंगाई दर और निर्यात-आयात पर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र से आयात करता है, इसलिए सरकार पहले से ही वैकल्पिक आपूर्ति और रणनीतिक भंडारण पर ध्यान दे रही है।
सरकार की रणनीति क्या है?
सरकार का फोकस तीन प्रमुख बिंदुओं पर है:
*ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना
*जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना
*वैश्विक संकट का घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर कम करना
