3 साल की बेटी को साथ लेकर ऑटो चलाती है मां, बेटी के भविष्य के लिए कर रही संघर्ष
कल्याण, महाराष्ट्र | जिंदगी ने बड़ा झटका दिया, लेकिन एक मां ने हार नहीं मानी। परभणी की रहने वाली एक महिला आज कल्याण की सड़कों पर अपनी 3 साल की बेटी को साथ बैठाकर ऑटो रिक्शा चलाती है, ताकि वह अपनी बेटी को बेहतर भविष्य दे सके।
परभणी से कल्याण तक का सफर
महिला का जन्म महाराष्ट्र के परभणी जिले में हुआ। उनका सपना था कि वह कॉलेज तक पढ़ाई करें और अच्छी नौकरी करें। लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी।इसके बाद 2018 में उनकी शादी हो गई और वह अपने पति के साथ कल्याण में रहने लगीं। उनके पति ऑटो रिक्शा चलाते थे और उसी दौरान उन्होंने अपनी पत्नी को भी ऑटो चलाना सिखाया।
जिंदगी का सबसे बड़ा झटका
2022 में बेटी ‘तेजू’ का जन्म हुआ, जिससे परिवार पूरा हो गया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।जब बेटी सिर्फ 18 महीने की थी, तब पति काम के बहाने परभणी गए और फिर कभी वापस नहीं आए। इसके बाद मां और छोटी बेटी पूरी तरह अकेले रह गए।
ऑटो चलाने का लिया बड़ा फैसला
घर चलाने के लिए उन्होंने नौकरी ढूंढी और उन्हें सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी भी मिली, लेकिन बेटी की देखभाल करने वाला कोई नहीं था। तब उन्होंने फैसला किया कि वह ऑटो चलाकर ही घर चलाएंगी। उन्होंने एक ऑटो किराए पर लिया और बेटी को साथ लेकर काम शुरू कर दिया।
बेटी के लिए ऑटो में बनाई खास सीट
शुरुआत में उन्होंने ऑटो के पीछे बेटी के लिए छोटा बिस्तर बनाया था, लेकिन यात्री बैठने पर बच्ची डर जाती थी। इसके बाद उन्होंने अपने बगल में बेटी के लिए छोटी सीट लगवा ली, जहां तेजू आराम से बैठती है।
मेहनत और बचत से खरीदा अपना ऑटो
वह रोज करीब 400 से 500 रुपये कमाती थीं। उसी से घर खर्च और ऑटो का किराया चलता था।थोड़ी-थोड़ी बचत करने के बाद करीब 5 महीने पहले उन्होंने EMI पर अपना ऑटो रिक्शा खरीद लिया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी
एक दिन उन्होंने अपनी बेटी के साथ ऑटो में बैठा एक छोटा वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।कुछ ही समय में यह वीडियो वायरल हो गया और लोगों ने उनकी मेहनत और हिम्मत की खूब तारीफ की।
बेटी के लिए बड़ा सपना
इस मेहनती मां का सिर्फ एक सपना है अपनी बेटी को इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाना।वह कहती हैं मैं दसवीं के बाद पढ़ाई नहीं कर पाई, लेकिन मेरी बेटी को वह शिक्षा जरूर मिलेगी जो मुझे नहीं मिल सकी।
