न्यू दिल्ली:
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका तथा ईरान के बीच संभावित संघर्ष की स्थिति का असर अब वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारत के कृषि क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण सिंचाई में इस्तेमाल होने वाली कई महत्वपूर्ण सामग्रियों के दाम अचानक बढ़ गए हैं, जिससे किसानों की आर्थिक चिंता और बढ़ गई है।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से कृषि उपकरण महंगे
खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। कच्चे तेल से बनने वाले कई रसायन और प्लास्टिक आधारित उत्पाद सिंचाई उपकरणों के निर्माण में उपयोग किए जाते हैं। यही कारण है कि अब पीवीसी पाइप, ड्रिप सिंचाई प्रणाली और पाला सिंचाई सेट जैसी सामग्री की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है।
व्यापारियों और कृषि उपकरण विक्रेताओं के अनुसार पिछले कुछ दिनों में सिंचाई उपकरणों की कीमतों में लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे खेती की लागत में अचानक वृद्धि हो गई है, जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ सकता है।
इन सामग्रियों के दाम सबसे ज्यादा बढ़े
कृषि बाजार से मिली जानकारी के अनुसार जिन उपकरणों की कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि हुई है, उनमें शामिल हैं:
पीवीसी पाइप
ड्रिप सिंचाई सिस्टम
पाला सिंचाई सेट
मोटर पंप
मोटर पंप में इस्तेमाल होने वाले केबल
इन सभी उपकरणों के निर्माण में पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उपयोग होता है, जो कच्चे तेल के शोधन से प्राप्त होते हैं। इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर इनके उत्पादन और बाजार कीमतों पर पड़ता है।
आपूर्ति में भी आ रही दिक्कत
व्यापारियों का कहना है कि केवल कीमतें ही नहीं बढ़ी हैं, बल्कि कच्चे माल की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण शिपिंग और आपूर्ति श्रृंखला में भी अनिश्चितता बढ़ गई है। इससे कई कंपनियों को समय पर कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण उत्पादन लागत और भी बढ़ रही है।
किसानों की बढ़ी चिंता
किसानों का कहना है कि पहले ही बीज, खाद और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से खेती महंगी हो चुकी है। अब सिंचाई उपकरणों की कीमतों में अचानक वृद्धि ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कई किसानों ने सरकार से इस मामले में राहत देने और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी बढ़ाने की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ऐसी स्थिति में कृषि उपकरणों और अन्य पेट्रोलियम आधारित उत्पादों के दाम भी आगे बढ़ने की संभावना है, जिससे खेती की लागत में और इजाफा हो सकता है।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
कृषि संगठनों ने सरकार से मांग की है कि सिंचाई उपकरणों पर अतिरिक्त सब्सिडी दी जाए और किसानों को सस्ती दरों पर उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि बढ़ती लागत के बावजूद खेती को जारी रखना संभव हो सके। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर आने वाले कृषि सीजन की उत्पादन लागत और फसल कीमतों पर भी पड़ सकता है।
