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मुंबई हेल्थ न्यूज़: सेंट जॉर्ज अस्पताल के ICU में 3 साल में 521 मौतें, मृत्यु दर लगभग 24%; सरकार ने सुधार के लिए बनाई विशेष समिति

मुंबई हेल्थ न्यूज़: सेंट जॉर्ज अस्पताल के ICU में 3 साल में 521 मौतें, मृत्यु दर लगभग 24%; सरकार ने सुधार के लिए बनाई विशेष समिति

मुंबई: मुंबई के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक अहम आंकड़ा सामने आया है। दक्षिण मुंबई स्थित सेंट जॉर्ज अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में पिछले तीन वर्षों के दौरान कुल 521 मरीजों की मौत दर्ज की गई है। यह आंकड़ा जुलाई 2022 से जुलाई 2025 के बीच का है और इसके अनुसार ICU में भर्ती हर चार मरीजों में से लगभग एक मरीज की उपचार के दौरान मृत्यु हुई है।

यह जानकारी महाराष्ट्र विधान परिषद में चिकित्सा शिक्षा मंत्री Hasan Mushrif ने लिखित उत्तर के माध्यम से दी। यह प्रश्न विभिन्न विधायकों द्वारा अस्पताल में ICU की स्थिति और कुछ मरीजों को बिना उपचार के छुट्टी देने के आरोपों के संदर्भ में उठाया गया था।

ICU में भर्ती मरीजों का आंकड़ा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2022 से जुलाई 2025 के बीच ICU में कुल 2,152 मरीजों को भर्ती किया गया। इनमें से 521 मरीजों की मौत हो गई, जिससे मृत्यु दर लगभग 24 प्रतिशत रही।

विधान परिषद में यह मुद्दा विधायक Pravin Darekar, Prasad Lad, Niranjan Davkhare, Uma Khapre, Sadashiv Khot, Parinay Fuke और Amit Gorkhe ने उठाया था।

इलाज अधूरा छोड़ने वाले मरीजों पर स्पष्टीकरण

मंत्री हसन मुश्रीफ ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल में Discharge Against Medical Advice (DAMA) यानी डॉक्टर की सलाह के खिलाफ इलाज अधूरा छोड़कर जाने वाले मरीजों की संख्या बहुत अधिक नहीं है।

आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में लगभग 7.8 प्रतिशत मरीजों ने इलाज पूरा किए बिना अस्पताल छोड़ा। सरकार के मुताबिक यह प्रतिशत अपेक्षाकृत कम है।

हर छह महीने में होती है मृत्यु ऑडिट

मंत्री ने बताया कि अस्पताल में होने वाली मौतों के कारणों की समीक्षा के लिए हर छह महीने में ‘मोर्टेलिटी ऑडिट’ किया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य इलाज की गुणवत्ता का मूल्यांकन करना और चिकित्सा पद्धतियों में सुधार करना है ताकि भविष्य में मरीजों की बेहतर देखभाल की जा सके।

आयुर्वेद और होम्योपैथी इंटर्न की भूमिका

ICU में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक इंटर्न की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। इस पर मंत्री ने कहा कि ये इंटर्न सिर्फ प्रशिक्षण के लिए उपस्थित रहते हैं और उपचार संबंधी कोई भी निर्णय नहीं लेते। सभी क्लिनिकल फैसले ड्यूटी पर मौजूद वरिष्ठ डॉक्टर ही लेते हैं।

RTI में सामने आए आंकड़ों में हुई थी गलती

अक्टूबर 2025 में एक आरटीआई के माध्यम से जो जानकारी सामने आई थी, उसमें ICU की मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत बताई गई थी। बाद में अस्पताल प्रशासन ने इसे डेटा गिनती में हुई मानवीय गलती बताया और आंकड़ों को संशोधित किया।

संशोधित आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 से 2025 के बीच ICU की वार्षिक मृत्यु दर 23 से 26 प्रतिशत के बीच रही।

अस्पताल प्रशासन ने बताई वजह

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इन आंकड़ों को संदर्भ के साथ समझना जरूरी है। अधिकारियों के मुताबिक कई बार 5 से 10 प्रतिशत मरीज अत्यंत गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचते हैं।

अक्सर ऐसा भी होता है कि मरीज पहले निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं और आर्थिक संसाधन खत्म होने के बाद या इलाज से मना किए जाने के बाद सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे मामलों में बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है, जिससे मृत्यु दर अधिक दिखाई दे सकती है।

ICU सेवाओं को मजबूत करने की तैयारी

इस बीच राज्य सरकार ने सेंट जॉर्ज अस्पताल में ICU सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह समिति ICU के कामकाज की समीक्षा करेगी, आवश्यक संसाधनों की पहचान करेगी और मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए सुधारात्मक कदम सुझाएगी।


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