नई दिल्ली:
भारत को रूस से मिलने वाले सस्ते कच्चे तेल का दौर अब खत्म होता दिख रहा है। हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, रूस का यूरल्स (Urals) क्रूड ऑयल अब भारतीय रिफाइनरियों को पहले की तरह भारी छूट पर नहीं मिल रहा है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलते हालात के कारण रूस अब अपने तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के करीब या उससे ऊपर रखने लगा है।
सूत्रों के अनुसार, रूस का यूरल्स क्रूड इस समय भारतीय खरीदारों को ब्रेंट क्रूड के मुकाबले लगभग 4 से 5 डॉलर प्रति बैरल ज्यादा कीमत पर ऑफर किया जा रहा है। यह स्थिति पहले के मुकाबले बिल्कुल अलग है। पिछले कई महीनों तक रूस भारत को अपना तेल करीब 13 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट देकर बेच रहा था। इसी वजह से भारत ने रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदना शुरू किया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तेल बाजार में मांग बढ़ने और सप्लाई सीमित होने के कारण रूस को अब अपने तेल पर भारी छूट देने की जरूरत नहीं पड़ रही है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों में बदलाव और कई देशों की बढ़ती खरीदारी के कारण भी रूस को बेहतर कीमत मिल रही है।
इस बीच भारत की कई बड़ी सरकारी तेल कंपनियां नई खेप खरीदने के लिए अंतरराष्ट्रीय ट्रेडर्स के साथ बातचीत कर रही हैं, ताकि देश में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पर कोई असर न पड़े। भारत जैसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए स्थिर ऊर्जा आपूर्ति बेहद जरूरी मानी जाती है।
हालांकि कीमतें बढ़ने के बावजूद रूस भारत के लिए कच्चे तेल का एक अहम स्रोत बना हुआ है। वर्ष 2022 के बाद से भारत ने रूस से तेल आयात में भारी बढ़ोतरी की है और आज रूस भारत के सबसे बड़े तेल सप्लायरों में शामिल हो चुका है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम दिखाता है कि वैश्विक तेल बाजार कितनी तेजी से बदल सकता है। पहले जहां रूस के सस्ते तेल से भारतीय रिफाइनरियों को बड़ा आर्थिक फायदा हो रहा था, वहीं अब बदलते बाजार हालात में वह लाभ धीरे-धीरे कम होता नजर आ रहा है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर भारत की तेल आयात रणनीति में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
