नवी मुंबई। शहर में सार्वजनिक शौचालयों की संख्या, उनके संचालन और वहां कार्यरत कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच को लेकर सूचना के अधिकार के तहत सामने आई जानकारी ने मनपा की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद सालुंखे द्वारा मांगी गई आरटीआई जानकारी के आधार पर दावा किया गया है कि नवी मुंबई महानगरपालिका के पास शहर के सभी सार्वजनिक शौचालयों का संपूर्ण और अद्यतन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। वहीं, इन स्थानों पर काम करने वाले कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन से संबंधित रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी में सार्वजनिक शौचालयों की संख्या, वहां कार्यरत कर्मचारियों तथा उनके पुलिस वेरिफिकेशन से संबंधित विवरण मांगे गए थे। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, शौचालयों से जुड़े आंकड़ों का पूरा और अद्यतन डेटाबेस उपलब्ध होने पर सवाल उठता है। इसके अलावा कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन संबंधी रिकॉर्ड को लेकर भी स्पष्टता नहीं होने का दावा किया गया है।
संवेदनशील स्थानों पर कर्मचारियों की जांच कितनी जरूरी?
सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और अन्य नागरिक करते हैं। ऐसे में वहां सफाई, रखरखाव और संचालन से जुड़े कर्मचारियों की पहचान तथा नियुक्ति प्रक्रिया का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण माना जाता है। आरटीआई से सामने आई जानकारी के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि सभी सार्वजनिक शौचालयों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों का केंद्रीकृत रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो उनकी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था किस तरह सुनिश्चित की जाती है।
सालुंखे के अनुसार, आरटीआई के जवाब में कुछ शौचालयों में कार्यरत कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन को लेकर निर्देश दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इससे यह सवाल उठता है कि कर्मचारियों की नियुक्ति के समय पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया किस स्तर पर लागू की जाती है और उसका रिकॉर्ड किस विभाग के पास सुरक्षित रखा जाता है।
पनवेल की घटना के बाद सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
अगस्त 2026 में पनवेल के वाल्मीकि नगर क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय से जुड़ी एक गंभीर घटना सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, 10 वर्षीय बच्ची के साथ कथित यौन अपराध के प्रयास के मामले में पनवेल महानगरपालिका के एक संविदा सफाई कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की गई थी।
यह घटना नवी मुंबई की व्यवस्था से अलग क्षेत्र में हुई थी, लेकिन इसके बाद सार्वजनिक शौचालयों में काम करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति, पहचान और पृष्ठभूमि जांच जैसे मुद्दों पर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, किसी एक घटना के आधार पर पूरे कर्मचारी वर्ग पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा, लेकिन ऐसी घटनाएं सुरक्षा प्रोटोकॉल और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत जरूर सामने लाती हैं।
मनपा से मांगी गई स्पष्ट जानकारी
सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद सालुंखे ने मनपा प्रशासन से सार्वजनिक शौचालयों को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। इसमें शहर में कुल कितने सार्वजनिक शौचालय हैं, कितने कर्मचारी वहां कार्यरत हैं, कितने कर्मचारी स्थायी और कितने ठेका व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं, कितने कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन हुआ है और उसका रिकॉर्ड कहां उपलब्ध है, जैसे सवाल शामिल हैं।
इसके साथ ही महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक सार्वजनिक शौचालय में सीसीटीवी, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, शिकायत प्रणाली और अन्य सुरक्षा उपायों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी उठाई गई है।
डिजिटल डेटाबेस और नियमित सुरक्षा ऑडिट की मांग
सालुंखे का कहना है कि मनपा को शहर के सभी सार्वजनिक शौचालयों का व्यापक सर्वेक्षण कराकर एक डिजिटल और अद्यतन डेटाबेस तैयार करना चाहिए। इस डेटाबेस में शौचालय का स्थान, संचालन एजेंसी, कर्मचारियों की संख्या, नियुक्ति संबंधी विवरण और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दर्ज की जा सकती है।
इसके साथ ही समय-समय पर कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच, आवश्यक पुलिस वेरिफिकेशन, सुरक्षा ऑडिट और शिकायतों की समीक्षा की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।
सफाई के साथ सुरक्षा भी जरूरी
सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था केवल साफ-सफाई और रखरखाव तक सीमित नहीं है। नागरिकों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरटीआई से उठे सवालों के बाद अब निगाह इस बात पर है कि नवी मुंबई मनपा सार्वजनिक शौचालयों का अद्यतन रिकॉर्ड, कर्मचारियों के सत्यापन और महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा से जुड़े उपायों को लेकर क्या स्पष्टीकरण देती है।
फिलहाल, आरटीआई में सामने आई जानकारी और सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा उठाए गए सवालों के आधार पर प्रशासन से रिकॉर्ड की पारदर्शिता, कर्मचारियों के सत्यापन और सार्वजनिक शौचालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर स्पष्ट जवाब की मांग की जा रही है।
