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95% हार्ट ब्लॉकेज ने बढ़ाई लाइफगार्ड की मुश्किलें, समय पर इलाज से मिली नई जिंदगी; पहले लगे स्टेंट की जगह दोबारा हुआ गंभीर ब्लॉकेज

95% हार्ट ब्लॉकेज ने बढ़ाई लाइफगार्ड की मुश्किलें, समय पर इलाज से मिली नई जिंदगी; पहले लगे स्टेंट की जगह दोबारा हुआ गंभीर ब्लॉकेज

नवी मुंबई। दूसरों की जान बचाने वाले 47 वर्षीय लाइफगार्ड राजाराम जोशी खुद उस समय गंभीर हृदय समस्या की चपेट में आ गए, जब उनकी दाहिनी कोरोनरी आर्टरी में करीब 95 प्रतिशत ब्लॉकेज पाया गया। सीने में लगातार दर्द और बढ़ते रक्तचाप के बाद उन्हें नवी मुंबई के न्युईरा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने समय पर जांच कर दोबारा एंजियोप्लास्टी की और उनकी जान बचाई।

वाशी गांव निवासी राजाराम जोशी को करीब आठ दिनों से सीने में दर्द की शिकायत थी। शुरुआत में दर्द को उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन तकलीफ बढ़ने के साथ उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। अस्पताल पहुंचने पर उनका ब्लड प्रेशर 195/120 mmHg पाया गया। ईसीजी में भी बदलाव दिखाई दिए। मरीज को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी बीमारी थी। करीब तीन वर्ष पहले उनकी एंजियोप्लास्टी भी हो चुकी थी।

मरीज की पिछली मेडिकल हिस्ट्री और वर्तमान लक्षणों को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल जांच शुरू की। एंजियोग्राफी में पता चला कि पहले लगाए गए स्टेंट वाली जगह पर ही दोबारा करीब 95 प्रतिशत गंभीर ब्लॉकेज बन गया था। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए तत्काल एंजियोप्लास्टी करने का निर्णय लिया।

न्युईरा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव सुराणा के अनुसार, पहले एंजियोप्लास्टी करा चुके मरीजों में सीने के नए या दोबारा होने वाले दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर सीने में दर्द के साथ पसीना आना, सांस लेने में परेशानी या रक्तचाप बढ़ना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

डॉ. सुराणा ने बताया कि मरीज की जांच में पहले लगाए गए स्टेंट के स्थान पर गंभीर ब्लॉकेज सामने आया। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम कारक दोबारा ब्लॉकेज की संभावना बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा धूम्रपान और इन बीमारियों को नियंत्रण में नहीं रखना भी हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है।

30 मिनट में पूरी हुई दोबारा एंजियोप्लास्टी

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने दाहिनी कोरोनरी आर्टरी में नया ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट लगाया। प्रक्रिया के दौरान एक पतली ट्यूब के माध्यम से ब्लॉकेज वाली जगह तक पहुंच बनाई गई। इसके बाद छोटे गुब्बारे की सहायता से रक्तवाहिनी को खोला गया और वहां नया दवा-युक्त स्टेंट लगाया गया। करीब 30 मिनट में प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हुई और रक्त प्रवाह में सुधार हुआ।

एंजियोप्लास्टी के बाद राजाराम जोशी को कुछ समय के लिए आईसीयू में निगरानी में रखा गया। उनकी हालत स्थिर होने के बाद उन्हें वार्ड में स्थानांतरित किया गया। करीब 24 घंटे की निगरानी के बाद डॉक्टरों ने उन्हें स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी। ब्लड प्रेशर की स्थिति को देखते हुए उनकी दवाओं में आवश्यक बदलाव किए गए और करीब 15 दिन आराम करने की सलाह दी गई।

डॉ. सुराणा ने कहा कि एंजियोप्लास्टी से ब्लॉकेज को खोलना संभव है, लेकिन इससे हृदय रोग का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता। जिन मरीजों की पहले एंजियोप्लास्टी हो चुकी है, उन्हें सीने में होने वाले नए या दोबारा होने वाले दर्द को केवल गैस या थकान मानकर टालना नहीं चाहिए। समय पर अस्पताल पहुंचने से गंभीर ब्लॉकेज का पता लगाया जा सकता है और आवश्यक उपचार जल्द शुरू किया जा सकता है।

इलाज के बाद राजाराम जोशी ने डॉक्टर डॉ. गौरव सुराणा और उनकी पूरी टीम का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में डॉक्टरों ने उनका हौसला बढ़ाया और समय पर उपचार मिलने से उनकी स्थिति में सुधार हुआ।

न्युईरा हॉस्पिटल के वाइस प्रेसिडेंट एवं सीईओ डॉ. माताप्रसाद गुप्ता ने कहा कि हृदय संबंधी आपात स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। अस्पताल की टीम मरीजों की जल्द जांच, समय पर उपचार और उनकी जरूरत के अनुसार देखभाल पर ध्यान देती है, ताकि मरीज जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकें।



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